मांगलिक दोष (Mangal Dosha) वैदिक ज्योतिष में विवाह के संदर्भ में सबसे अधिक चर्चित दोषों में से एक है। आइए इसे वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टि से समझें।
मांगलिक दोष क्या है?
जब किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में मंगल ग्रह 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में स्थित होता है, तो उस व्यक्ति को मांगलिक कहा जाता है। ऐसी कुंडली वाले व्यक्ति के विवाह में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
मांगलिक दोष के प्रभाव
- विवाह में देरी
- वैवाहिक जीवन में तनाव और कलह
- जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव
- तलाक या अलगाव की संभावना
मांगलिक दोष रद्द (Cancel) कब होता है?
कई परिस्थितियों में मांगलिक दोष स्वतः निरस्त हो जाता है:
- मंगल यदि मेष, वृश्चिक, मकर या कर्क राशि में हो
- यदि मंगल के साथ गुरु या चंद्र बैठे हों
- यदि दोनों पक्ष मांगलिक हों (Manglik + Manglik = दोष निरस्त)
- 28 वर्ष की आयु के बाद मंगल दोष का प्रभाव कम हो जाता है
उपाय
कुंभ विवाह
मांगलिक व्यक्ति का विवाह पहले पीपल के पेड़, केले के पेड़ या विष्णु की मूर्ति से करवाया जाता है। इससे दोष पेड़ या मूर्ति को हस्तांतरित माना जाता है।
मंत्र जाप
"ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः।।"
मंगलवार को 108 बार जाप करें।
हनुमान पूजा
मंगलवार को हनुमान मंदिर जाएं। हनुमान जी मंगल ग्रह के देवता माने जाते हैं।